
शामली। गन्ना मूल्य भुगतान में देरी होने पर किसानों को मिलने वाले ब्याज का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने को लेकर किसानों में आक्रोश है। किसान एकता संघर्ष समिति (संगठन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी परमवीर शास्त्री के नेतृत्व में किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर शामली गन्ना समिति से ब्याज का रिकॉर्ड दिलाने की मांग की है।
किसानों ने बताया गया कि किसान अपनी गन्ने की फसल चीनी मिलों को गन्ना समितियों के माध्यम से आपूर्ति करते हैं। नियमानुसार गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए, लेकिन चीनी मिलों द्वारा निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया। पत्र में दावा किया गया कि 16 जुलाई 2026 को माननीय उच्च न्यायालय ने पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक 14 दिन से अधिक देरी से हुए गन्ना मूल्य भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है।
किसानों का आरोप है कि ब्याज का रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए वे 7 सितंबर 2026 से शामली गन्ना समिति पर लगातार धरना दे रहे हैं। इसके बावजूद समिति के अधिकारी किसानों को ब्याज का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और न ही रिकॉर्ड नहीं देने का कोई लिखित कारण बता रहे हैं।
किसानों ने बताया कि 27 अक्टूबर को समिति के सचिव ने किसानों को जानकारी दी थी कि एक साल का रिकॉर्ड तैयार है, जबकि शेष दो वर्षों का रिकॉर्ड एक सप्ताह में उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद करीब 20 से 25 किसान रिकॉर्ड लेने पहुंचे तो समिति कर्मचारियों ने रिकॉर्ड देने से मना कर दिया। आरोप है कि सचिव ने भी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया।
किसानों ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर ब्याज का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि किसानों को रिकॉर्ड नहीं दिया गया तो वे शामली गन्ना समिति में तालाबंदी करने के लिए मजबूर होंगे। किसानों ने इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही है।

